Character · Ramayana

Narada in the Ramayana

नारदNamed in 74 verses

Speaks in 62 verses

In this book

Places
Lanka, Ayodhya
Most often with
Valmiki, Rama
  1. Kanda 172
  2. Kanda 22

Key chapters

The chapters where Narada matters most.

  1. Vālmīki’s Yogic Verification and the Epic Synopsis

    Ramayana 1.3 · 30 verses

    Referenced source of the complete kathā

Key episodes

  1. Valmiki and the Krauncha Birds: The First Shloka

    Ramayana 1.2

Every verse that names Narada

74 verses

  1. 1.1.1

    वाल्मीकि रिशियों में बड़े थे। उन्होंने नारद से सवाल किया। नारद तपस्या में लगे रहते थे, वैदिक पढ़ाई करते थे। वो बोलने वाले सबसे बेस्ट थे।

  2. 1.1.2

    बताओ तोह सही, आज के ज़माने में कौन है इतना अच्छा? कौन है जो स्ट्रांग है, धरम जानता है, अच्छा काम याद रखता है, सच बोलता है, और अपनी बात पक्की रखता है?

  3. 1.1.3

    ऐसा कौन है जो अच्छा करता है और सबकी भलाई चाहता है? कौन है जो सच में समझदार है और काम कर सकता है? जिसे लोग देख के खुश हो जाते हैं, वो कौन है?

  4. 1.1.4

    बताओ, ऐसा कौन है जो खुद का कंट्रोल में रहता है? ऐसा कौन है जिसका गुस्सा कभी नहीं आता? जो चमकता है और किसी से जलता नहीं? ऐसा कौन है जिसका गुस्सा देख के देवता भी डर जाते हैं?

  5. 1.1.5

    मुझे यह बात सुननी है, बड़ा सवाल है मेरे मन में। महा रिशि, आप जानते हैं कि ऐसा कोई आदमी है क्या जिसमे यह सब गुण हो।

  6. 1.1.6

    नारद ने वाल्मीकि की बात सुन ली। वो तीनों दुनिया की बात जानते थे। खुश हो के बोले, सुनो मैं बताता हूँ।

  7. 1.1.7

    मुनि, जो गुण तुमने बताये वो लोगों में बहुत कम मिलते हैं। मैं जानता हूँ एक ऐसा आदमी को जिसमे यह सब गुण हैं। सुनो मैं उसके बारे में बताता हूँ।

  8. 1.1.9

    राम बहुत समझदार है। वो सही काम करना जानता है। अच्छे से बोलता है। उसपे भगवान की कृपा है। दुश्मनों को हराता है। उसके कंधे चौड़े हैं। बाजू में ताकत है। गर्दन अच्छी है। मुँह पक्का है।

  9. 1.1.10

    उसकी छाती चौड़ी थी। बड़ा धनुष चलाता था। उसकी हड्डियाँ आपस में जुरी हुई थीं। दुश्मनों को हराने वाला था। उसकी बाहें घुटनों तक जाती थीं। सिर अच्छा था, माथे पे चमक थी। बहुत हिम्मत वाला था।

  10. 1.1.11

    वो न बहुत लंबा था न बहुत छोटा। उसका बॉडी एकदम सही था, रंग चमकदार था। सीना चौड़ा था, आँखें बड़ी थी, चेहरे पर अच्छे निशान थे।

  11. 1.1.12

    वो धरम जानता था, सच बोलता था। अपने लोगों का भला चाहता था। सब उसका नाम जानते थे, वो समझदार था, साफ दिल था, और हमेशा अपने काम में लगा रहता था।

  12. 1.1.13

    राम इतने बड़े थे कि लोग उन्हे प्रजापति जैसा मानते थे। वो दुनिया को चलाते थे और दुश्मनों को खत्म करते थे। सब जीवन की हिफाज़त करते थे और धरम को भी बचा के रखते थे।

  13. 1.1.14

    अपने राज धरम को निभाया और अपने लोगों की हिफाज़त की। वेदों और उनके सब अंगों का पूरा ज्ञान था। धनुर्विद्या में बड़ा माहिर था, शब्दिक भी और प्रैक्टिकल भी।

  14. 1.1.15

    सब शास्त्र के मतलब को समझते थे। याद ऐसी कि कभी भूलते नहीं थे। सोच साफ थी और सबसे अच्छा सुलझाता था। सब लोग उनसे प्यार करते थे। अच्छे स्वभाव के थे और हिम्मत कभी नहीं हारती थी।

  15. 1.1.16

    अच्छे लोग उसके पास आते रहते थे, जैसे नदियाँ समुंदर में जाती हैं। वो बड़ा आदमी था, सबसे एक जैसा प्यार करता था। उसका चेहरा हमेशा अच्छा लगता था।

  16. 1.1.17

    वोह हर गुण में परफेक्ट था। कौसल्या का चेहरा देख के खुल जाता था, इतना खुश होती थी। समुंदर जैसा गहरा था, और हिमाचल जैसा स्ट्रांग।

  17. 1.1.18

    विष्णु जैसा पावरफुल था। चेहरा इतना अच्छा था जैसे चाँद। गुस्सा आए तोह जैसे आग लग जाए। इतना पेशेंट था जैसे धरती। दान में कुबेर जैसा। और सच बोलने में धरम का बेटा था।

  18. 1.1.19

    दशरथ ने देखा कि राम में सब गुण हैं। सच में स्ट्रांग है, सबसे बड़ा बेटा है, सबसे अच्छा है। लोगों का भला चाहता है, लोगों को खुश रखना चाहता है। इसलिए दशरथ ने दिल से सोचा कि इसको राजकुमार बना दू।

  19. 1.1.23

    दशरथ राजा ने एक बार वादा कर दिया था। अब उस वादे को तोड़ नहीं सकता था। धरम ने खींच लिया। इसलिए अपने प्यारे बेटा राम को वनवास भेजना पड़ा।

  20. 1.1.26

    सीता राम की पत्नी थी। राम उससे अपनी जान से भी ज़्यादा प्यार करते थे। जनक की बेटी थी वो। भगवान ने उसको बनाया था जैसे कोई कला का कमाल हो। औरतों में सबसे ऊपर थी वो। राम के पीछे चली गई जैसे चाँद के पीछे रोहिणी चली जाती है।