चतु॑: स्रक्ति॒र्नाभि॑रृ॒तस्य॑ स॒प्रथा॒: स नो॑ वि॒श्वायु॑: स॒प्रथा॒: स न: स॒र्वायु॑: स॒प्रथा॑: । अप॒ द्वेषो॒ अप॒ ह्वरो॒ऽन्यव्र॑तस्य सश्चिम
Transliteration
catúḥ sraktír nā́bhir ṛtásya sapráthāḥ sá no viśvā́yuḥ sapráthāḥ sá naḥ sarvā́yuḥ sapráthāḥ | ápa dvéṣo ápa hváro ’nyavratásya saścim |
Translation
चार कोनों वाला, ऋत (ऋत-व्यवस्था) की नाभि, सर्वत्र फैलने वाला—वह हमारे लिए सर्व-आयु में व्यापक हो, समस्त-आयु में व्यापक हो। द्वेष दूर हो, वक्र हानि दूर हो; अन्य-व्रत (पर-आचार) वाले को हम पीछे ढकेल दें।