Dashati 10
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Dashati 10

Pavamāna Soma’s forward-flowing purification and empowering exhilaration within the sacrifice

Deity

Soma Pavamāna

Melodic Character

Bright urgent forward-driving (pra/asṛkṣata) with a lucid ‘purifying’ sonic color

Rishi Family

This dashati draws from Ṛgvedic Pavamāna material whose precise r̥ṣi-attribution varies by underlying hymn and śākhā concordance; a definitive family name requires mapping each mantra to its RV source and padānukramaṇī.

यह दशति पवमान सोम के शुद्ध होकर वेग से आगे बहने और यज्ञ में उत्साह-शक्ति भरने का स्तवन है। निचोड़े हुए रस ‘प्र’ होकर छाननी से उज्ज्वल बनते हुए आहुति की ओर बढ़ते हैं; वे ‘मदच्युत’ होकर इन्द्र को पराक्रम के लिए उन्मत्त-बल देते हैं और देवों को तृप्त करते हैं। इस प्रवाह में धारा-तरंग (सिन्धु–ऊर्मि) और शुक्ल तेज का बिंब है—शुद्धि ही उसकी यज्ञ-योग्यता है। सोम ‘कवि’ होकर प्रेरित वाणी जगाता है और गायक-ऋत्विज (कारु) तथा स्तोत्र को सहारा देता है। फलस्वरूप यजमान को श्रवस् (यश), गौ-धन, अश्व, और वीर सन्तान/वीर पुरुषों की समृद्धि प्राप्त हो—यही प्रार्थना है।

Mantras

Mantra 1

प्र सोमासो मदच्युतः श्रवसे नो मघोनः सुता विदथे अक्रमुः

हे मघवन् (उदार स्वामी)! मद-प्रद सोम-रस, निचोड़े जाने पर, हमारे यश के लिए यज्ञ-विधि में आगे बढ़े हैं।

Saman: Pavamana-sāman (generic; śākhā-specific tune assignment)

Mantra 2

प्र सोमासो विपश्चितो ऽपो नयन्त ऊर्मयः वनानि महिषा इव

प्रज्ञावान् सोम-रस आगे बढ़ते हैं; आपः (जल) धाराओं को ले चलती हैं—मानो बलवान् महिष, वन-झाड़ियों को चीरते हुए।

Saman: Pavamana-sāman (generic)

Mantra 3

पवस्वेन्दो वृषा सुतः कृधी नो यशसो जने विश्वा अप द्विषो जहि

हे इन्दु! वृषभ-सम तेजस्वी, सुत (निचोड़ा हुआ) होकर स्वयं को पवित्र कर; मनुष्यों में हमें यशस्वी कर; समस्त द्वेषियों को दूर कर, और नष्ट कर।

Saman: Pavamana-sāman (generic)

Mantra 4

वृषा ह्यसि भानुना द्युमन्तं त्वा हवामहे पवमान स्वर्दृशम्

तू भानु (दीप्ति) से निश्चय ही वृषा—बलवान् है; हे पवमान, स्वर्दृश (स्वर्ग-दर्शी) दीप्तिमान्! हम तुझे आह्वान करते हैं।

Saman: Pavamana-sāman (generic)

Mantra 5

इन्दुः पविष्ट चेतनः प्रियः कवीनां मतिः सृजदश्वं रथीरिव

हे इन्दु, अति-शुद्ध पविष्ट, चेतन (बुद्धिमान), कवियों का प्रिय—तू ऋषियों की मति (प्रेरित बुद्धि) है; रथी की भाँति अश्व को आगे प्रवाहित/प्रेरित कर।

Saman: Pavamana-sāman (generic)

Mantra 6

असृक्षत प्र वाजिनो गव्या सोमासो अश्वया शुक्रासो वीरयाशवः

प्रवाहित हुए हैं ये वाजिन (बलवान) सोम-रस—गव्य (गौ-प्रद), अश्वय (अश्व-प्रद); ये शुक्ल (दीप्त) हैं, और वीर्याशवः—वीरों को देने की आकांक्षा वाले।

Saman: Pavamana-sāman (generic)

Mantra 7

पवस्व देव आयुषगिन्द्रं गच्छतु ते मदः वायुमा रोह धर्मणा

हे देव सोम! आयुष्य-प्रद, तू पवित्र हो; तेरा मद (उल्लास) इन्द्र के पास जाए; विधि/धर्म के अनुसार वायु पर आरोहण कर।

Saman: Pavamana-sāman (generic)

Mantra 8

पवमानो अजीजनद्दिवश्चित्रं न तन्यतुम् ज्योतिर्वैश्वानरं बृहत्

पवमान (शुद्ध होता) सोम ने दिव से अद्भुत ज्योति उत्पन्न की—गर्जन-सी प्रतिध्वनि वाली—महान वैश्वानर प्रकाश।

Saman: Pavamana-sāman (generic)

Mantra 9

परि स्वानास इन्दवो मदाय बर्हणा गिरा मधो अर्षन्ति धारया

चारों ओर निनाद करते इन्दु (सोम-बिन्दु) मद के लिए धारा में बहते हैं; देवों को बल देने वाले, स्तुति-गिरा के साथ, मधुरता सहित प्रवाहित होते हैं।

Saman: Pavamana-sāman (generic)

Mantra 10

परि प्रासिष्यदत्कविः सिन्धोरूर्मावधि श्रितः कारुं बिभ्रत्पुरुस्पृहम्

चारों ओर प्रवाहित, कवि-स्वरूप सोम, सिंधु की तरंग पर आश्रित होकर, बहुजन-आकांक्षित उस गायक (कारु) को धारण और पोषण करता है।

Saman: Unknown/unspecified (requires Sāmavedic gāna-prayoga mapping for this arcika locus)

Frequently Asked Questions

It celebrates Soma as it is pressed and purified, moving forward like a stream, becoming bright and fit for offering, and bringing strength and prosperity to the sacrificer.

Because Soma’s ‘mada’ (exhilarating power) is classically linked to Indra’s heroic energy; the chant implies Soma invigorates Indra so the sacrifice succeeds and its fruits are secured.

They are melodic syllables added to shape the tune—lengthening cadence, supporting breath, and creating a flowing, wave-like musical effect that matches the imagery of Soma’s purification.