Adhyaya 91 — The Gods’ Hymn to Kātyāyanī and the Goddess’ Prophecy of Future Manifestations
विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वं विश्वात्मिका धारयसिति विश्वम् ।
विश्वेशवन्द्या भवती भवन्ति विश्वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः ॥
viśveśvari tvaṃ paripāsi viśvaṃ viśvātmikā dhārayasīti viśvam /
viśveśavandyā bhavatī bhavanti viśvāśrayā ye tvayi bhaktinamrāḥ
हे जगत की अधीश्वरी, तुम जगत की रक्षा करती हो; सबकी आत्मा-स्वरूप होकर जगत को धारण करती हो। जगत के ईश्वर द्वारा भी तुम पूजित हो; जो भक्तिभाव से तुम्हें प्रणाम करते हैं, वे संसार के लिए आश्रय बनते हैं।