Adhyaya 10 — Jaimini’s Questions on Birth, Death, Karma, and the Embodied Journey
विण्मूत्रपिच्छिले स्त्रीणां तथा कोष्ठे मयोषितम् ।
पीडाश्च सुभृशं प्राप्ता रोगाणां च सहस्रशः ॥
viṇmūtra-picchile strīṇāṃ tathā koṣṭhe mayoṣitam | pīḍāś ca subhṛśaṃ prāptā rogāṇāṃ ca sahasraśaḥ ||
स्त्रियों के शरीर पर मल-मूत्र का लेप होता है; और गर्भ के भीतर भी मांसमयी ‘स्त्री’ (अर्थात देह की अशुद्ध सामग्री) रहती है। महान क्लेश सहे हैं, और हज़ारों रोग भी।