Virāṭa-parva Adhyāya 23: Report of the Slain Sūtaputras, Royal Orders, and Sairandhrī’s Return
भीमसेन उवाच अहं शृणोमि ते वाचं त्वया सैरन्ध्रि भाषिताम् । तस्मात् ते सूतपुत्रेभ्यो भयं भीरु न विद्यते,भीमसेन बोले--सैरन्ध्री! तुम जो कुछ कह रही हो, तुम्हारी वह वाणी मैं सुनता हूँ। इसलिये भीरु! अब इन सूतपुत्रोंसे तेरे लिये कोई भय नहीं है
bhīmasena uvāca | ahaṃ śṛṇomi te vācaṃ tvayā sairandhri bhāṣitām | tasmāt te sūtaputrebhyo bhayaṃ bhīru na vidyate ||
भीमसेन बोले—सैरन्ध्री! तुमने जो वाणी कही है, मैं उसे सुन चुका हूँ। इसलिए भीरु! अब उन सूतपुत्रों से तुम्हें कोई भय नहीं है।
भीमसेन उवाच