Āścarya-kathana: Brāhmaṇa–Nāga Dialogue on Sūrya (Vivasvat) and the ‘Second Sun’ Phenomenon
अत्रापि स विजानाति पुरुष ब्रह्म॒वित्तमम् । नारायणपरो मोक्षस्ततो वै सात्त्विक: स्मृत:
वह यह भी भलीभाँति जानता है कि परमपुरुष नारायण ही सर्वोत्तम ब्रह्मवेत्ता हैं और मोक्ष का परम आश्रय भी नारायण ही हैं; इसलिए वह मनुष्य सात्त्विक माना गया है।
वैशम्पायन उवाच