Āścarya-kathana: Brāhmaṇa–Nāga Dialogue on Sūrya (Vivasvat) and the ‘Second Sun’ Phenomenon
देहबन्धेषु पुरुष: श्रेष्ठ: कुरुकुलोदह । सात््विक: पुरुषव्याप्र भवेन्मोक्षाय निश्चित:
पुरुषसिंह, कुरुकुल-श्रेष्ठ! देहबन्धन में स्थित इन जीवों में जो सात्त्विक प्रकृति से युक्त पुरुष है, वही श्रेष्ठ है; क्योंकि वही मोक्ष का निश्चित अधिकारी है।
वैशम्पायन उवाच