Nārāyaṇasya Guhya-nāmāni Niruktāni (Etymologies of Nārāyaṇa’s Secret Epithets) / नारायणस्य गुह्यनामानि निरुक्तानि
नारद उवाच तत्त्वं जिज्ञासतां पूर्वमृषीणां भावितात्मनाम् | सनत्कुमारो भगवानिदं वचनमत्रवीत्
नारदजी ने कहा—वत्स! पूर्वकाल में पवित्र अन्तःकरण वाले ऋषियों ने तत्त्वज्ञान की जिज्ञासा से प्रश्न किया। उसके उत्तर में भगवान् सनत्कुमार ने यह वचन कहा।
नारद उवाच