नारद–शुक संवादः (Nārada–Śuka Dialogue): Tyāga, Saṃyama, and Vyakta–Avyakta Viveka
तदेवमुपशान्तेन दान्तेनैकान्तशीलिना । आत्मारामेण बुद्धेन योक्तव्यो55त्मा न संशय:
इस प्रकार प्राणायाम द्वारा मन को वश में करके, शान्त, जितेन्द्रिय, एकान्तशील, आत्माराम और ज्ञानी पुरुष को चाहिए कि वह मन को परमात्मा में लगाए— इसमें कोई संशय नहीं।
याज़्ञवल्क्य उवाच