Utkramaṇa-sthāna and Ariṣṭa-lakṣaṇa: Yājñavalkya’s Instruction on Departure Pathways and Mortality Signs
भारं स वहते तस्य ग्रन्थस्यार्थ न वेत्ति यः । यस्तु ग्रन्थार्थतत्त्वज्ञो नास्य ग्रन्थागमो वृथा
जो ग्रन्थ के अर्थ को नहीं जानता, वह मानो केवल उस ग्रन्थ का बोझ ढोता है; पर जो ग्रन्थार्थ-तत्त्व को जानता है, उसके लिए उस ग्रन्थ का अध्ययन व्यर्थ नहीं होता।
वसिष्ठ उवाच