Śoka-śamana: Kṛṣṇa’s Consolation and Nārada’s Exempla to Sṛñjaya
Chapter 29
परं सहस्राद् यो बद्धान् हयान् वेदीर्वितत्य च । सहस्र॑ं यत्र पद्मानां कण्वाय भरतो ददौ
paraṁ sahasrād yo baddhān hayān vedīr vitatya ca | sahasraṁ yatra padmānāṁ kaṇvāya bharato dadau ||
वायु ने कहा— उन्होंने सहस्र से भी अधिक घोड़े बाँधे, यज्ञ-वेदियों का विस्तार करके अश्वमेध यज्ञ किये। उस यज्ञ में भरत ने आचार्य कण्व को सुवर्ण-निर्मित एक हजार कमल भेंट किये।
वायुदेव उवाच