उशनसः (शुक्रस्य) चरितम् — The Account of Uśanā (Śukra): Yoga, Grievance, and Pacification
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुछ २३ श्लोक हैं) ऑपन-माज बछ। अकाल एकोनाशीरवत्याधिकद्विशततमो< ध्याय: ब्रहद्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र- संवादक आरम्भ युधिछिर उवाच धन्या धन्या इति जना: सर्वेडस्मान् प्रवदन्त्युत । न दुःखिततर: ककश्ित् पुमानस्माभिरस्ति ह
yudhiṣṭhira uvāca |
dhanyā dhanyā iti janāḥ sarve ’smān pravadanty uta |
na duḥkhitatarah kaścit pumān asmābhir asti ha ||
युधिष्ठिर बोले— सब लोग हमें ‘धन्य-धन्य’ कहते रहते हैं; पर सच तो यह है कि हमसे बढ़कर दुःखी कोई मनुष्य नहीं है।
युधिछिर उवाच