प्रजाविसर्ग-तत्त्वनिर्णयः | Cosmogony of Elemental Emergence
Bharadvāja–Bhṛgu Dialogue
पितोवाच कथमभ्याहतो लोक: केन वा परिवारित: । अमोघा: का: पतन्तीह कि नु भीषयसीव माम्
पिता ने कहा—यह लोक किस प्रकार आहत है? किसने इसे घेर रखा है? यहाँ कौन-सी अमोघ शक्तियाँ गिर रही हैं? तुम मुझे भयभीत-सा क्यों कर रहे हो?
भीष्म उवाच