Ākiṃcanya–Tyāga Upadeśa
The Instruction on Non-ownership and Renunciation
मृष्टाभरणसम्पन्नो भूषणैरककसंनिभै: । भूषित: सर्वगात्रेषु देवगर्भ: श्रिया ज्वलन्
उसके अंगों में सूर्य-किरणों के समान दीप्तिमान आभूषण शोभा दे रहे थे। वह देवकुमार अपने समस्त अंगों में निर्मल और दिव्य भूषण धारण किए, दिव्य तेज से देदीप्यमान था।
भीष्म उवाच