आपद्धर्मनिर्णयः — विश्वामित्र-श्वपचसंवादः
Apaddharma Determination: Dialogue of Viśvāmitra and the Śvapaca
नन्दामि सौम्य भद्र ते यो मां जीवितुमिच्छसि । श्रेयक्ष॒ यदि जानीषे क्रियतां मा विचारय
सौम्य! मैं तुम्हारा अभिनन्दन करता हूँ; तुम्हारा कल्याण हो। तुम जो मुझे जीवित रखना चाहते हो, उससे मैं प्रसन्न हूँ। यदि तुम हमारे कल्याण का उपाय जानते हो तो उसे कर डालो; मन में कोई अन्यथा विचार न लाओ।
भीष्म उवाच