Vyāghra–Gomāyu Saṃvāda (व्याघ्रगोमायु संवाद) — Testing Character Beneath Appearances
त॑ स गोमायुरालोक्य स्नेहादागतसम्भ्रमम् । उवाच प्रणतो वाक््यं बाष्पगद्गदया गिरा
taṁ sa gomāyur ālokya snehād āgata-sambhramam | uvāca praṇato vākyaṁ bāṣpa-gadgadayā girā ||
उसे देखकर—जिसका व्याकुल होना स्नेह से उत्पन्न हुआ था—वह झुककर बोला; आँसुओं से गद्गद और काँपती वाणी में उसके शब्द रुक-रुककर निकलने लगे।
भीष्म उवाच