Kṣemadarśa–Kālakavṛkṣīya Saṃvāda: Counsel on Impermanence, Non-attachment, and Composure in Dispossession
यच्च पूर्व समाहारे यच्च पूर्व परे परे । सर्व तन्नास्ति ते चैव तज्ज्ञात्वा कोडनुसंज्वरेत्
जो वस्तु पहले बड़े समुदाय के अधीन रही और जो एक के बाद एक के पास जाती रही—वह सब तुम्हारी भी नहीं है। यह भलीभाँति जान लेने पर फिर किसे बार-बार चिन्ता होगी?
भीष्म उवाच