Kṣemadarśa–Kālakavṛkṣīya Saṃvāda: Counsel on Impermanence, Non-attachment, and Composure in Dispossession
भूत्वा च न भवत्येतदभूत्वा च भविष्यति । शोके न हाूस्ति सामर्थ्य शोकं॑ कुर्यात् कथंचन
यह राजलक्ष्मी होकर भी नहीं टिकती और जिनके पास नहीं होती, उनके पास आ जाती है। शोक में यह सामर्थ्य नहीं कि वह गई हुई सम्पत्ति लौटा दे; इसलिए किसी भी प्रकार शोक नहीं करना चाहिए।
भीष्म उवाच