व्यालतस्करसंकीर्णे सार्थहीना यथा वने । सूतपुत्रे हते राजंस्तव योधास्तथाभवन्
राजन्! जैसे सर्पों और चोर-डाकुओं से भरे वन में अपने दल से बिछुड़े लोग अनाथ होकर भारी विपत्ति में पड़ जाते हैं, वैसे ही सूतपुत्र कर्ण के मारे जाने पर आपके योद्धाओं की भी वही दशा हो गई।
संजय उवाच