हतारोहा यथा नागाश्छिन्नहस्ता यथा नरा: । सर्वे पार्थमयं लोकं सम्पश्यन्तो भयार्दिता:
जिनके सवार मारे गए हों ऐसे हाथी और जिनके हाथ कट गए हों ऐसे मनुष्य जैसी दुर्दशा में पड़ जाते हैं, वैसी ही दशा को प्राप्त होकर समस्त कौरव भय से पीड़ित हो सारे जगत् को अर्जुनमय देखने लगे।
संजय उवाच