Cakravyūha-saṃkalpaḥ, Saṃśaptaka-āhvānaṃ, Saubhadra-vikrīḍitam
Drona Parva, Adhyāya 32
सरो हंसा इवापेतुर्घ्नन्तो द्रोणरथं प्रति । तदनन्तर अपनी भुजाओंसे सुशोभित होनेवाले पाण्डव सेनापतिकी आज्ञाका पालन करनेके लिये वहाँ द्रोणाचार्यके रथपर प्रहार करते हुए उसी प्रकार टूट पड़े, जैसे बहुत-से हंस किसी सरोवरपर सब ओरसे उड़कर आते हैं
saro-haṃsā ivāpetur ghnanto droṇa-rathaṃ prati | tad-anantaraṃ pāṇḍava-senāpaty-ājñāṃ pālayituṃ tatra droṇācārya-rathe prahārān kurvantaḥ samantād nipetuḥ, yathā bahavo haṃsāḥ sarasi samantād uḍḍīya samāgacchanti |
संजय बोले—जैसे सरोवर पर सब ओर से उड़कर बहुत-से हंस आ जुटते हैं, वैसे ही योद्धा द्रोण के रथ पर टूट पड़े और उस पर प्रहार करने लगे। तत्पश्चात भुजबल और शोभा से विभूषित पाण्डव-सेनापति की आज्ञा का पालन करने हेतु वे द्रोणाचार्य के रथ को चारों दिशाओं से घेरकर बार-बार आघात करने लगे।
संजय उवाच