भीष्मस्य जलप्रार्थना — अर्जुनस्य पर्जन्यास्त्रप्रयोगः — दुर्योधनं प्रति सन्ध्युपदेशः
Bhīṣma’s request for water; Arjuna’s Parjanya-astra; counsel to Duryodhana on reconciliation
विरथ॑ सैन्धवं चक्रे सर्वलोकस्य पश्यत: । आर्य! वहाँ पाण्डुनन्दन भीमसेनने रणक्षेत्रमें यह अद्भुत कर्म किया कि सब महारथियोंको बाणोंसे घायल करके रोक दिया और सब लोगोंके देखते-देखते सिन्धुराजको रथहीन कर दिया
sañjaya uvāca | virathaṃ saindhavaṃ cakre sarvalokasya paśyataḥ |
संजय बोले—सब लोगों के देखते-देखते पाण्डुनन्दन भीमसेन ने रणभूमि में अद्भुत कर्म किया। उसने महारथियों को बाणों से घायल करके रोक दिया और सबके सामने सैन्धव-राज जयद्रथ को रथहीन कर दिया।
संजय उवाच