देवैर्विष्णोः शरणागमनम्—शिवलिङ्गस्थापनं, शिवसहस्रनामस्तवः, सुदर्शनचक्रप्रदानं च
संवत्सरकरो मन्त्रः प्रत्ययः सर्वदर्शनः अजः सर्वेश्वरः स्निग्धो महारेता महाबलः
saṃvatsarakaro mantraḥ pratyayaḥ sarvadarśanaḥ ajaḥ sarveśvaraḥ snigdho mahāretā mahābalaḥ
वह संवत्सर-चक्र का कर्ता है; वह स्वयं पवित्र मन्त्र है; वह प्रत्यय—निश्चय का आधार—और सर्वदर्शी है। वह अज (अजन्मा), सर्वेश्वर, करुणा से स्निग्ध; महारेता (महाशक्ति-सम्पन्न) और महाबलवान है।
Suta Goswami (narrating the Shiva Sahasranama to the sages of Naimisharanya)