देवैर्विष्णोः शरणागमनम्—शिवलिङ्गस्थापनं, शिवसहस्रनामस्तवः, सुदर्शनचक्रप्रदानं च
गोपयामास कमलं तदैकं भुवनेश्वरः हृतपुष्पो हरिस्तत्र किमिदं त्वभ्यचिन्तयत्
gopayāmāsa kamalaṃ tadaikaṃ bhuvaneśvaraḥ hṛtapuṣpo haristatra kimidaṃ tvabhyacintayat
तब भुवनेश्वर ने उस एक कमल को छिपा लिया। वहाँ पुष्प-भेंट से वंचित हरि ने मन में विचार किया—“यह क्या हुआ?”
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)