देवैर्विष्णोः शरणागमनम्—शिवलिङ्गस्थापनं, शिवसहस्रनामस्तवः, सुदर्शनचक्रप्रदानं च
तस्मात्तेन निहन्तव्या नान्यैः शस्त्रशतैरपि ततो निशम्य तेषां वै वचनं वारिजेक्षणः
tasmāttena nihantavyā nānyaiḥ śastraśatairapi tato niśamya teṣāṃ vai vacanaṃ vārijekṣaṇaḥ
अतः वह उसी उपाय से मारा जाए—अन्य किसी से नहीं, चाहे सैकड़ों शस्त्र क्यों न हों। उनका यह वचन सुनकर कमल-नेत्र ने मन में विचार कर परामर्श स्वीकार किया।
Suta Goswami (narrating the internal counsel within the story)