देवैर्विष्णोः शरणागमनम्—शिवलिङ्गस्थापनं, शिवसहस्रनामस्तवः, सुदर्शनचक्रप्रदानं च
संयोगी योगविद्ब्रह्म ब्रह्मण्यो ब्राह्मणप्रियः देवप्रियो देवनाथो देवज्ञो देवचिन्तकः
saṃyogī yogavidbrahma brahmaṇyo brāhmaṇapriyaḥ devapriyo devanātho devajño devacintakaḥ
वह संयोगी—योग का स्वामी, योगविद्, और स्वयं ब्रह्म है। वह ब्रह्मण्य—धर्म-वेद-रक्षक, ब्राह्मणप्रिय है। वह देवप्रिय, देवनाथ, देवज्ञ, और देवों द्वारा निरन्तर चिन्तित (ध्यात) है।
Suta Goswami (narrating to the sages at Naimisharanya) as part of the Linga Purana Shiva Sahasranama