देवैर्विष्णोः शरणागमनम्—शिवलिङ्गस्थापनं, शिवसहस्रनामस्तवः, सुदर्शनचक्रप्रदानं च
त्रिलोकात्मा त्रिलोकेशः शुद्धः शुद्धी रथाक्षजः अव्यक्तलक्षणो व्यक्तो व्यक्ताव्यक्तो विशांपतिः
trilokātmā trilokeśaḥ śuddhaḥ śuddhī rathākṣajaḥ avyaktalakṣaṇo vyakto vyaktāvyakto viśāṃpatiḥ
वे त्रिलोक के आत्मा और त्रिलोकेश हैं; शुद्ध हैं और शुद्धि करने वाले हैं। वे रथाक्षज हैं—रथ के अक्ष की भाँति अचल। अव्यक्त के लक्षण से युक्त होकर भी वे व्यक्त हैं; वे व्यक्त-अव्यक्त दोनों हैं, और समस्त प्रजाओं के स्वामी हैं।
Suta Goswami (narrating the Shiva Sahasranama to the sages of Naimisharanya)