अध्याय ९६: शरभ-प्रादुर्भावः, नृसिंह-दर्पशमनम्, विष्णोः शिवस्तुतिः, फलश्रुति
वज्राशनिरिव स्थाणोस् त्व् एवं मृत्युः पतिष्यति सूत उवाच इत्युक्तो वीरभद्रेण नृसिंहः क्रोधविह्वलः
vajrāśaniriva sthāṇos tv evaṃ mṛtyuḥ patiṣyati sūta uvāca ityukto vīrabhadreṇa nṛsiṃhaḥ krodhavihvalaḥ
‘स्थाणु पर वज्र-आघात की भाँति, इसी प्रकार मृत्यु तुम पर आ गिरेगी।’ सूत बोले—वीरभद्र के ऐसा कहने पर, क्रोध से व्याकुल नरसिंह (उत्तर देने को तत्पर हुआ)।
Suta (narrator), quoting Vīrabhadra addressing Narasiṁha