अविमुक्तक्षेत्रमाहात्म्य — काशी-वाराणसी में मोक्ष, लिङ्ग-तीर्थ-मानचित्र, और उपासना-विधि
निहतो हिमवत्पुत्रि जम्बूकेशस्ततो ह्यहम् अद्यापि जगति ख्यातं सुरासुरनमस्कृतम्
nihato himavatputri jambūkeśastato hyaham adyāpi jagati khyātaṃ surāsuranamaskṛtam
हे हिमवान्-पुत्री! जम्बूकेश का वध करके मैं तब ‘जम्बूकेश्वर’ नाम से प्रसिद्ध हुआ। आज भी जगत में मैं विख्यात हूँ, और देव तथा असुर—दोनों मुझे नमस्कार करते हैं।
Shiva (within Suta’s narration to the sages of Naimisharanya)