अविमुक्तक्षेत्रमाहात्म्य — काशी-वाराणसी में मोक्ष, लिङ्ग-तीर्थ-मानचित्र, और उपासना-विधि
देवराजस्तथा शक्रो ये ऽपि चान्ये दिवौकसः उपासते महात्मानः सर्वे मामिह सुव्रते
devarājastathā śakro ye 'pi cānye divaukasaḥ upāsate mahātmānaḥ sarve māmiha suvrate
हे सुव्रते, देवराज इन्द्र (शक्र) तथा अन्य दिव्यलोकवासी भी—वे सब महात्मा—यहाँ मेरी उपासना करते हैं।
Shiva (internal dialogue within Suta’s narration)