अविमुक्तक्षेत्रमाहात्म्य — काशी-वाराणसी में मोक्ष, लिङ्ग-तीर्थ-मानचित्र, और उपासना-विधि
तस्मात्संसेवनीयं हि अविमुक्तं हि मुक्तये जैगीषव्यः परां सिद्धिं गतो यत्र महातपाः
tasmātsaṃsevanīyaṃ hi avimuktaṃ hi muktaye jaigīṣavyaḥ parāṃ siddhiṃ gato yatra mahātapāḥ
इसलिए मोक्ष के लिए अविमुक्त (काशी) का नित्य सेवन करना चाहिए; वहीं महातपस्वी जैगीषव्य ने पाश-च्छेदक पति-शिव की कृपा से परम सिद्धि—मुक्ति—प्राप्त की।
Suta Goswami (narrating the kṣetra-māhātmya within the Linga Purana to the sages of Naimisharanya)