अविमुक्तक्षेत्रमाहात्म्य — काशी-वाराणसी में मोक्ष, लिङ्ग-तीर्थ-मानचित्र, और उपासना-विधि
भेरीमृदङ्गमुरजतिमिरापटहादिभिः वादित्रैर्विविधैश्चान्यैर् निनादैर्विविधैरपि
bherīmṛdaṅgamurajatimirāpaṭahādibhiḥ vāditrairvividhaiścānyair ninādairvividhairapi
भेरी, मृदंग, मुरज, तिमिरा-ढोल, पटह आदि तथा अन्य अनेक वाद्यों से उन्होंने विविध निनाद किए—पति, भगवान् शिव के उत्सव में अर्पित मंगल ध्वनि।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)