अविमुक्तक्षेत्रमाहात्म्य — काशी-वाराणसी में मोक्ष, लिङ्ग-तीर्थ-मानचित्र, और उपासना-विधि
जलेन केवलेनैव गन्धतोयेन भक्तितः अनुलेपनं तु तत् सर्वं पञ्चविंशत्पलेन वै
jalena kevalenaiva gandhatoyena bhaktitaḥ anulepanaṃ tu tat sarvaṃ pañcaviṃśatpalena vai
केवल शुद्ध जल से—या सुगन्धित जल से—भक्ति सहित जो अर्पण किया जाए, वह सम्पूर्ण अनुलेपन (लिङ्ग-लेपन) पच्चीस पल के प्रमाण से ही करना चाहिए।
Suta Goswami (narrating Shiva-puja procedures to the sages of Naimisharanya)