अविमुक्तक्षेत्रमाहात्म्य — काशी-वाराणसी में मोक्ष, लिङ्ग-तीर्थ-मानचित्र, और उपासना-विधि
संध्या च ऋतवश्चैव सर्वा नद्यः सरांसि च समुद्राः सप्त चैवात्र देवतीर्थानि कृत्स्नशः
saṃdhyā ca ṛtavaścaiva sarvā nadyaḥ sarāṃsi ca samudrāḥ sapta caivātra devatīrthāni kṛtsnaśaḥ
यहाँ संध्याएँ, ऋतुएँ, समस्त नदियाँ और सरोवर, तथा सातों समुद्र—ये सब पूर्णतः देव-तीर्थ रूप में विद्यमान हैं।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)