अविमुक्तक्षेत्रमाहात्म्य — काशी-वाराणसी में मोक्ष, लिङ्ग-तीर्थ-मानचित्र, और उपासना-विधि
तं दृष्ट्वा शैलजा प्राह हृष्टसर्वतनूरुहा स्तुवती चरणौ नत्वा क इमे भगवन्निति
taṃ dṛṣṭvā śailajā prāha hṛṣṭasarvatanūruhā stuvatī caraṇau natvā ka ime bhagavanniti
उन्हें देखकर शैलजा का समस्त शरीर रोमांचित हो उठा। प्रभु की स्तुति करती हुई वह चरणों में नत होकर बोली—“हे भगवन्, ये कौन हैं?”
Śailajā (Pārvatī)