अविमुक्तक्षेत्रमाहात्म्य — काशी-वाराणसी में मोक्ष, लिङ्ग-तीर्थ-मानचित्र, और उपासना-विधि
अविमुक्तेश्वरं लिङ्गं मम दृष्ट्वेह मानवः सद्यः पापविनिर्मुक्तः पशुपाशैर्विमुच्यते
avimukteśvaraṃ liṅgaṃ mama dṛṣṭveha mānavaḥ sadyaḥ pāpavinirmuktaḥ paśupāśairvimucyate
यहाँ मेरा ‘अविमुक्तेश्वर’ लिंग जो मनुष्य दर्शन करता है, वह तत्क्षण पाप से मुक्त हो जाता है और पशु-जीव के पाश-बन्धनों से भी छूट जाता है।
Shiva (within Suta’s narration to the sages of Naimisharanya)