यतिप्रायश्चित्तविधानम्
Ascetic Atonements and Discipline
अहिंसा सर्वभूतानां कर्मणा मनसा गिरा अकामादपि हिंसेत यदि भिक्षुः पशून् कृमीन्
ahiṃsā sarvabhūtānāṃ karmaṇā manasā girā akāmādapi hiṃseta yadi bhikṣuḥ paśūn kṛmīn
कर्म, मन और वाणी से समस्त प्राणियों के प्रति अहिंसा ही नियम है; फिर भी यदि भिक्षु अनिच्छा से भी पशुओं या कृमियों को कष्ट पहुँचाए, तो वह व्रतभंग का दोषी माना जाता है। शिवकृपा चाहने वाले पशु के लिए यह संयम पाश-छेदन का द्वार है और पति शिव की ओर उन्मुख करता है।
Suta Goswami (narrating Purāṇic dharma-teaching within the Linga Purana discourse)