यतिप्रायश्चित्तविधानम्
Ascetic Atonements and Discipline
एवं कृत्वा सुदुष्टात्मा भिन्नवृत्तो व्रताच्च्युतः भूयो निर्वेदमापन्नश् चरेच्चान्द्रायणं व्रतम्
evaṃ kṛtvā suduṣṭātmā bhinnavṛtto vratāccyutaḥ bhūyo nirvedamāpannaś careccāndrāyaṇaṃ vratam
इस प्रकार करके दुष्टचित्त, आचरण से विचलित और व्रत से च्युत व्यक्ति को फिर सच्चे पश्चात्ताप सहित चान्द्रायण-व्रत का आचरण करना चाहिए, जिससे पशु (बद्ध जीव) के पाश शिथिल हों और वह पति शिव के पथ की ओर लौटे।
Suta Goswami (narrating śāstric injunctions within the Linga Purana to the sages of Naimiṣāraṇya)