योगान्तरायाः, औपसर्गिकसिद्धयः, परवैराग्येन शैवप्रसादः
औपसर्गिकम् आ ब्रह्म भुवनेषु परित्यजेत् लोकेष्वालोक्य योगेन योगवित्परमं सुखम्
aupasargikam ā brahma bhuvaneṣu parityajet lokeṣvālokya yogena yogavitparamaṃ sukham
योग का ज्ञाता लोकों का अवलोकन कर ब्रह्मलोक तक के औपसर्गिक क्लेशों का परित्याग करे और योग द्वारा परम सुख को प्राप्त हो। शैव सिद्धान्त में यही विवेक पाश को शिथिल कर पशु को पति-शिव की ओर उन्मुख करता है।
Suta Goswami (narrating Linga Purana teachings to the sages, summarizing yogic instruction)