Adhyaya 89: शौचाचारलक्षणम् — सदाचार, भैक्ष्यचर्या, प्रायश्चित्त, द्रव्यशुद्धि, आशौच-निर्णय
वैश्यः पञ्चदशाहेन शूद्रो मासेन शुध्यति इति संक्षेपतः प्रोक्ता द्रव्यशुद्धिरनुत्तमा
vaiśyaḥ pañcadaśāhena śūdro māsena śudhyati iti saṃkṣepataḥ proktā dravyaśuddhiranuttamā
वैश्य पंद्रह दिनों में शुद्ध होता है और शूद्र एक मास में शुद्ध होता है। इस प्रकार संक्षेप में द्रव्य-शुद्धि का उत्तम विधान कहा गया है।
Suta Goswami