Adhyaya 89: शौचाचारलक्षणम् — सदाचार, भैक्ष्यचर्या, प्रायश्चित्त, द्रव्यशुद्धि, आशौच-निर्णय
सूतिकाशौचसंयुक्तः शावाशौचसमन्वितः संस्पृशेन्न रजस्तासां स्पृष्ट्वा स्नात्वैव शुध्यति
sūtikāśaucasaṃyuktaḥ śāvāśaucasamanvitaḥ saṃspṛśenna rajastāsāṃ spṛṣṭvā snātvaiva śudhyati
जो सूतिका-आशौच या शव-आशौच से युक्त हो, वह रजस्वला स्त्रियों का संस्पर्श न करे। यदि स्पर्श हो जाए तो केवल स्नान करके ही शुद्धि होती है।
Suta Goswami (narrating Purana-dharma to the sages of Naimisharanya)