Adhyaya 89: शौचाचारलक्षणम् — सदाचार, भैक्ष्यचर्या, प्रायश्चित्त, द्रव्यशुद्धि, आशौच-निर्णय
देवकार्योपयुक्तानां प्रत्यहं शौचमिष्यते इतरेषां हि वस्त्राणां शौचं कार्यं मलागमे
devakāryopayuktānāṃ pratyahaṃ śaucamiṣyate itareṣāṃ hi vastrāṇāṃ śaucaṃ kāryaṃ malāgame
देवकार्य में प्रयुक्त वस्त्रों का प्रतिदिन शौच (शुद्धि) करना विधि है। अन्य वस्त्रों की शुद्धि तब करनी चाहिए जब उन पर मलिनता या अशुद्धि लग जाए।
Suta Goswami