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Shloka 22

ध्यानयज्ञः, संसार-विष-निरूपणम्, पाशुपतयोगः, परा-अपरा विद्या, चतुर्वस्था-विचारः (अध्यायः ८६)

गर्भे दुःखान्यनेकानि योनिमार्गे च भूतले कौमारे यौवने चैव वार्द्धके मरणे ऽपि वा

garbhe duḥkhānyanekāni yonimārge ca bhūtale kaumāre yauvane caiva vārddhake maraṇe 'pi vā

गर्भ में अनेक दुःख हैं; फिर योनि-मार्ग में और पृथ्वी पर भी। बाल्यावस्था, युवावस्था, वृद्धावस्था और मृत्यु के समय भी—दुःख बना रहता है; जब तक देह-बंधन के पाश से बँधा पशु-जीव पति शिव की शरण नहीं लेता।

गर्भेin the womb
गर्भे:
दुःखानिsufferings
दुःखानि:
अनेकानिmany
अनेकानि:
योनिमार्गेin the passage of the womb/birth-canal
योनिमार्गे:
and
:
भूतलेon the earth/world
भूतले:
कौमारेin childhood
कौमारे:
यौवनेin youth
यौवने:
च एवand indeed
च एव:
वार्द्धकेin old age
वार्द्धके:
मरणेin death/at the time of dying
मरणे:
अपिeven
अपि:
वाor
वा:

Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)