उमामहेश्वरव्रतं—पञ्चाक्षरमन्त्रस्य माहात्म्यं, न्यासः, जपविधिः, सदाचारः, विनियोगः
करयोरुभयोश्चैव दशाग्रांगुलिषु क्रमात् प्रक्षाल्य पादावाचम्य शुचिर्भूत्वा समाहितः
karayorubhayoścaiva daśāgrāṃguliṣu kramāt prakṣālya pādāvācamya śucirbhūtvā samāhitaḥ
तत्पश्चात् क्रम से दोनों हाथों की दसों उँगलियों के अग्रभाग धोए, पाँव शुद्ध करे और आचमन करे। फिर शुद्ध होकर अंतर्मुखी व समाहित चित्त से पति—भगवान् शिव—की पूजा हेतु स्थिर रहे।
Suta Goswami (narrating Shiva-puja procedure to the sages at Naimisharanya)