उमामहेश्वरव्रतं—पञ्चाक्षरमन्त्रस्य माहात्म्यं, न्यासः, जपविधिः, सदाचारः, विनियोगः
पादादिमूर्धपर्यन्तं संहारो भवति प्रिये हृदयास्यगलन्यासः स्थितिन्यास उदाहृतः
pādādimūrdhaparyantaṃ saṃhāro bhavati priye hṛdayāsyagalanyāsaḥ sthitinyāsa udāhṛtaḥ
हे प्रिये, संहार-न्यास पाद से लेकर मस्तकपर्यन्त किया जाता है। हृदय, मुख और कण्ठ में जो न्यास होता है, वह ‘स्थितिन्यास’ कहा गया है।
Suta Goswami (narrating an internal Shaiva teaching dialogue, likely Shiva instructing Parvati)