उमामहेश्वरव्रतं—पञ्चाक्षरमन्त्रस्य माहात्म्यं, न्यासः, जपविधिः, सदाचारः, विनियोगः
यस्यैवं हृदि संस्थो ऽयं मन्त्रः स्यात्पारमेश्वरः तेनाधीतं श्रुतं तेन तेन सर्वमनुष्ठितम्
yasyaivaṃ hṛdi saṃstho 'yaṃ mantraḥ syātpārameśvaraḥ tenādhītaṃ śrutaṃ tena tena sarvamanuṣṭhitam
जिसके हृदय में यह पारमेश्वर मंत्र इस प्रकार दृढ़ होकर स्थित हो, उसके द्वारा मानो शास्त्र पढ़े गए, उसके द्वारा मानो वे सुने गए, और उसके द्वारा मानो समस्त अनुष्ठान संपन्न हो गए।
Suta Goswami (narrating the mantra’s greatness within the Linga Purana discourse)