उमामहेश्वरव्रतं—पञ्चाक्षरमन्त्रस्य माहात्म्यं, न्यासः, जपविधिः, सदाचारः, विनियोगः
अन्नशुद्धौ सत्त्वशुद्धिर् न मृदा न जलेन वै सत्त्वशुद्धौ भवेत्सिद्धिस् ततो ऽन्नं परिशोधयेत्
annaśuddhau sattvaśuddhir na mṛdā na jalena vai sattvaśuddhau bhavetsiddhis tato 'nnaṃ pariśodhayet
अन्न की शुद्धि से ही सत्त्व की शुद्धि होती है—केवल मिट्टी या जल से नहीं। सत्त्व शुद्ध होने पर सिद्धि प्राप्त होती है; इसलिए अन्न को पवित्र करना चाहिए।
Suta Goswami (narrating Shiva-oriented discipline within the Purva-Bhaga teaching stream)