अध्याय ८२ — व्यपोहनस्तवः (पापव्यपोहन-स्तोत्रम्)
तान्सर्वान् शीघ्रमाप्नोति देवानां च प्रियो भवेत् पठ्यमानमिदं पुण्यं यमुद्दिश्य तु पठ्यते
tānsarvān śīghramāpnoti devānāṃ ca priyo bhavet paṭhyamānamidaṃ puṇyaṃ yamuddiśya tu paṭhyate
वह उन सब फलों को शीघ्र प्राप्त करता है और देवताओं का प्रिय बनता है। यह पुण्य-पाठ जिस उद्देश्य से या जिस व्यक्ति के निमित्त पढ़ा जाता है, उसी के अनुसार पावन फल प्रदान करता है।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimiṣāraṇya)