अध्याय ८२ — व्यपोहनस्तवः (पापव्यपोहन-स्तोत्रम्)
लक्ष्मीः सर्वगुणोपेता सर्वलक्षणसंयुता सर्वदा सर्वगा देवी सा मे पापं व्यपोहतु
lakṣmīḥ sarvaguṇopetā sarvalakṣaṇasaṃyutā sarvadā sarvagā devī sā me pāpaṃ vyapohatu
सर्वगुणसम्पन्न, सर्वलक्षणयुक्त, सदा सर्वत्र व्याप्त देवी लक्ष्मी—वह मेरा पाप दूर करे। शैव-दृष्टि में उसकी कृपा से पशु का पाश शिथिल होता है और पति शिव में भक्ति जागती है।
Suta Goswami (primary narrator) conveying a stuti/prayer within the Purva-Bhaga context